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Friday, January 27, 2017

नन्हे से फरिश्ते...


यादें धुंधली होती जा रही हैं। आज से ठीक चार माह बाद तुम आठ साल के हो जाओगे। तुम्हारे बचपन की उतनी बातें तो याद नहीं हैं मुझे, पर वो पल नहीं भूली जब पहली बार मुझे ऑपरेशन थियेटर में ही नन्हे से फरिश्ते को दिखाया था। और शायद जब तक जिंदगी है तक तक उस क्षण को भूल नहीं सकती। हरे रंग के टॉवल में गुलाबी रुई से रंगत वाला वह नन्हा मुन्ना लिपटा हुआ था।
ऑपरेशन थियेटर में बेड पर मुझे लिटा दिया गया...पेट पर से पर्दा डाल दिया। आधा अंग सुन्न कर दिया था पर मैं होशो हवास में थी। डॉक्टरों की आपसी बातचीत कान में पड़ रही थी तभी दूर से कही बच्चे के रोने की आवाज आयी। बेचैन सी मैंने डॉक्टर से पूछ डाला क्या है- मेरा मतलब था लड़का या लड़की। इतने दिनों से सस्पेंस जो बना था। डॉक्टर के हंसने की आवाज आयी रुको बेटा अभी पता चल जाएगा तुम्हें ।
इतना तो अहसास हो गया था कि भगवान ने मेरी झोली को भर दिया है। तभी हरे रंग के टॉवेल में लिपटा एक सुंदर सा नन्हाे मुन्ना बच्चे को मेरे पास ले आए और कहा देख लो... ‘गेस करो क्या है...’ मेरे होठों पर हंसी थिरक आयी मैंने कहा- ‘बेटी’ चूंकि दिल से चाहत थी कि बेटी आए। डॉक्टर ने कहा- उहूं ‘बेटा’। मैंने कहा ‘कोई ना, सुंदर है...’ और मुस्कुरा दी।
आज आठ साल होने को हैं पर तुम और प्यारे होते जा रहे हो... तुम्हारे बिना जीना मुश्किमल हो गया है अब भगवान तुम्हें मेरी आयु भी लगा दे, सारी खुशियां तुम्हें मिले... अच्छे इंसान बनो... कामयाबी कदम चूमे।
तुम्हारी मम्मू

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