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Monday, November 14, 2011

सॉरी मम्मी...


मां मुझको अपनी आंचल में छुपा ले
गले से लगा ले कि और मेरा कोई नहीं
अब न सताऊंगा मुझे पास बुला ले
ऊंगली पकड़ के तेरी मां मैं चला हूं
तेरे बिना मुझको अब कौन संभाले
गले से लगा ले कि और मेरा कोई नहीं

ये गाना मुझे बहुत पसंद है... आज अनायास ही याद आ गया। एक और बात है मुझे अपनी मम्मी से माफी मांगने का मन कर रहा है, सीधा-सीधा तो बोल नहीं पाऊंगी। आज मेरी एक गलती की वजह से उन्हें काफी कुछ सुनना पड़ा है... वो दुखी हैं उनकी आवाज से मालूम होता है... सॉरी मम्मी।

Wednesday, August 31, 2011

आ गई मुस्कुराहट


अपनी तारीफ किसे नहीं सुहाती यह एक ऐसी सच्चाई है जिसे कोई नकार ही नहीं सकता. आज सुबह मेरा भी मन हुआ की कोई मेरे लिए दो लफ्ज तारीफ के बोले पर... कुछ स्पेशल जो पहना था मैंने :) सबने कहा पर जिससे उम्मीद की उसने नहीं. तीन बार पूछा होगा या चार- पांच बार पर हूं हां में जवाब मिला। मुझे लगा शायद अब फोन पर... पर नाउम्मीदी के सिवा कुछ नहीं.
फिर अभी सुबह का वाकया याद आ गया जब तैयार होकर निकल रही थी घर से. भले मुंह से ना बोला हो पर आंखों में शायद कुछ था...।
क्योंकि पूछा था रुमाल है तुम्हारे पास पसीना आ रहा है
एक मुस्कुराहट आ गई मेरे चेहरे पर याद जो आ गया उनका अंदाज।